ढिबरी
अन्हियारे से लड़ती अदना ढिबरी... सीने मे दावानल भी ... और सागर अगम अतल भी...
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बुधवार, 5 मई 2010
लेकिन मैंने हार न मानी .... (पदम सिंह)
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राहें कठिन अजानी संघर्षो की अकथ कहानी लेकिन मैंने हार न मानी आशाओं के व्योम अनंतिम स्वप्नों का ढह जाना दिन दिन संबंधों के तान...
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सोमवार, 3 मई 2010
हम हमेशा को एक हो जाएँ
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एक पुरानी रचना दे रहा हूँ ... शुरूआती दौर की रचना है .... पता नहीं कैसी लगे आपको .... चलो एक दूसरे में खो जाएँ हम हमेशा को एक हो जाएँ भटकत...
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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010
चप्पल चोरी बनाम दरोगा जी ....(पद्म सिंह)
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19-04-2010 की सुबह... नौचंदी एक्सप्रेस ट्रेन धड़ धड़ कर चली जा रही थी .... लगभग पांच छह के आसपास का वक्त था... ट्रेन की बर्थ पर लेटे लेटे ल...
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शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010
मालो जर हो तो मुत्तहिद रहना, प्यार हो गर तो फिर बिखर जाना
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एक बार गुरु नानक साहब किसी गाँव से गुजर रहे थे अपने शिष्यों और अनुगामियों के साथ, रात होने के कारण उसी गाँव में डेरा डाल दिया ... गाँव वाल...
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गुरुवार, 1 अप्रैल 2010
तुम्हारे जाने से पहले तक कुछ भी नहीं था चकित करने जैसा... एक नज्म (पदम सिंह)
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तुम्हारे जाने से पहले तक कुछ भी नहीं था चकित करने जैसा घिरा था धुंध सा छलावा मेरे अस्तित्व के गिर्द जाले थे मेरी नज़रों पर पलकों के बिछोने प...
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मंगलवार, 30 मार्च 2010
खयालों के परिंदे इस लिए आज़ाद रखता हूँ
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जफा की धूप में अब्र-ए-वफ़ा की शाद रखता हूँ इसी तरहा मोहोब्बत का चमन आबाद रखता हूँ छुपा लेता हूँ मै अक्सर तुम्हारी याद के आंसू यही ...
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शनिवार, 27 मार्च 2010
एक हज़ल (खतरनाक सी)
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मित्रों आप लोगों को हमेशा लगता था कि इस ब्लॉग पर सीरियस और दार्शनिक रचनाएं भरी रहती हैं तो मैंने सोचा क्यों न आज कुछ नया प्रस्तुत किया जाय ...
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