सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

प्रकाश पर्व ..


मेरे द्वार पर जलते हुए दिए
तू बरसों बरस जिए ...
आंधियां सहना
मगर द्वार पर ही रहना
क्योकि यही है
मेरी अभिलाषा
मेरी आकांक्षा
मेरी चाह

कि सदा आलोकित करना
द्वार से गुज़रती हुई राह
क्योकि जब कोई राही
अपनी राह पायेगा
प्रकाश से दमकता कोई चेहरा
मुस्कुराएगा
तो उजाला मेरी बखार तक न सही
अंतर्मन तक जरूर आएगा
अंतर्मन तक जरूर आएगा

.......आपका पद्म


3 टिप्‍पणियां:

  1. आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं

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  2. आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को दीपावली पर्व की ढेरों मंगलकामनाएँ!

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  3. दीप-पर्व की हमारी बधाई भी स्वीकार करें !

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