सुबह हो गयी कौवा बोला
लल्ला ने कंप्यूटर खोला
आँखें मींचे ऊपर नीचे
फेसबुकी संदेश निहारे
हाय हैलो की टेर लगाई
गुड मॉर्निंग के चस्पे मारे
मैसेज वाला बॉक्स टटोला
सुबह हो गयी कौवा बोला
अनगढ़ सा इक शेर निकाला
इधर उधर की फोटू डाला
चाय लिखा, नमकीन दिखाई
सुबह सुबह की सैर बताई
अखबारों से ख़बर उड़ाई
उसे बना स्टेटस ठेला
सुबह हो गयी कौवा बोला
सुन्दर सुन्दर मुखड़े छांटे
बड्डे बड्डे हैप्पी बाँटे
छाँट छाँट रिक्वेस्ट सहेजा
बेस्ट फ्रेंड को मैसेज भेजा
फिर मैडम को कुहनी मारी
बेट्टी तो लाओ मुँह खोला
सुबह हो गयी कौवा बोला
पाँच टिप्पणी पंद्रह लाइक
मन प्रसन्न स्टेटस टाइट
क्रान्ति शान्ति समझा आए हैं
सबको नीति बता आए हैं
जितना ज्ञान बचा रक्खा था
सबको बाँटा तोला तोला
सुबह हो गयी कौवा बोला…
मैडम ने जब झिड़क लगाई
तब धरती पर लौटे भाई
ड्यूटी का टाइम हो आया
आधा धोया जरा नहाया
बस के पीछे पीछे भागे
थामे हाथ टिफ़िन का झोला
सुबह हो गयी कौवा बोला
लल्ला ने कंप्यूटर खोला।
(निर्मल हास्य) …. पद्म सिंह
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