ढिबरी
अन्हियारे से लड़ती अदना ढिबरी... सीने मे दावानल भी ... और सागर अगम अतल भी...
मंगलवार, 26 नवंबर 2024
लेकिन मैने हार न मानी (पद्म सिंह)
रविवार, 5 फ़रवरी 2023
जैसी चादर ले कर आए
जैसी चादर लेकर आए
वैसी धर दी जस की तस ॥
ओढ़े स्वांग भरे दिन दिन
काँटे बोए जिसने उसकी
राहों दीप धरे गिन गिन
माना नहीं पराया कुछ भी
जो भी पाया यश अपयश ।।
कभी भीड़ ने या निर्जन ने
भरी कुलाँचें भी यौवन ने
उकसाया भी पागल मन ने
दायित्वों की डोर कहीं से
बंधी हुई थी पर कस कस ।।
क्या खोया है क्या पाया
किस निमित्त आए थे जग मे
प्रश्न निरुत्तर ही पाया
रोते हुए हृदय को निस दिन
खूब छकाया है हँस हँस ।।
साँसें हाँफ हाँफ कर दौड़ी
मन बौराया रहा जोड़ता
धन सुख वैभव कौड़ी कौड़ी
धड़कन एक दिन थक कर बैठी
बोली साथी अब तो बस ॥
वैसी धर दी जस की तस
पद्म सिंह (प्रतापगढ़) उत्तर प्रदेश 7011100247
शनिवार, 10 अक्टूबर 2020
कैक्टस गुलाब और गुलाबजामुन
रविवार, 10 फ़रवरी 2013
भाई हद्द है !!
एक थैली मे रहें दिन रात.... भाई हद्द है ...
और उधर संसद मे जूता-लात... भाई हद्द है
आपके पैसे की रिश्वत आप को
सड़क बिजली घर की लालच आपको
चुनावी मौसम मे सेवक आपके
जीत कर पूंछें न अपने बाप को
आप ही के धन से धन्नासेठ हैं
आप ही पर लगाते हैं घात ... भाई हद्द है
शिकारी या भिखारी हर वेश मे
जहाँ मौका मिले धन्धा कूट लें
क्या गजब का हुनर पाया है कि ये
जिस तरफ नज़रें उठा दें लूट लें
दो धड़ों मे बाँट कर इन्सान को
एक चिंगारी उछालें .........फूट लें
अब लगी अपनी बुझाओ आप ... भाई हद्द है
जाति भाषा क्षेत्र वर्गों मे फंसी
सोच अपनी जेल बन कर रह गई
वोट के आखेट पर हैं रहनुमा
राजनीति गुलेल बन कर रह गई
लोकशाही आज के इस दौर मे
खानदानी खेल बन कर रह गई
जिन्हें उंगली पकड़ चलना सिखाया
वही बन बैठे हैं माई बाप... भाई हद्द है
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रविवार, 13 जनवरी 2013
सर कटा भी है सर झुका भी है....
सोमवार, 7 जनवरी 2013
चला गजोधर कौड़ा बारा(अवधी)
कथरी कमरी फेल होइ गई
अब अइसे न होइ गुजारा
चला गजोधर कौड़ा बारा...
गुरगुर गुरगुर हड्डी कांपय
अंगुरी सुन्न मुन्न होइ जाय
थरथर थरथर सब तन डोले
कान क लवर झन्न होइ जाय
सनामन्न सब ताल इनारा
खेत डगर बगिया चौबारा
बबुरी छांटा छान उचारा ...
चला गजोधर कौड़ा बारा...
बकुली होइ गइ आजी माई
बाबा डोलें लिहे रज़ाई
बचवा दुई दुई सुइटर साँटे
कनटोपे माँ मुनिया काँपे
कौनों जतन काम ना आवे
ई जाड़ा से कौन बचावे
हम गरीब कय एक सहारा
चला गजोधर कौड़ा बारा....
कूकुर पिलई पिलवा कांपय
बरधा पँड़िया गैया कांपय
कौवा सुग्गा बकुली पणकी
गुलकी नेउरा बिलरा कांपय
सीसम सुस्त नीम सुसुवानी
पीपर महुआ पानी पानी
राम एनहुं कय कष्ट नेवरा
चला गजोधर कौड़ा बारा ...
.... पद्म सिंह (अवधी)
-- आइये जाने इन्टरनेट पर हिन्दी मे कैसे लिखें .
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