गुरुवार, 2 जुलाई 2026

धूप

सवेरे ही शाम का मज़मून गढ़ जाती है धूप
एक सफ़हा ज़िन्दगी का रोज़ पढ़ जाती है धूप

लाँघती परती तपाती खेत, घर ,जंगल, शहर
धड़धड़ाती रेल सी आती है बढ़ जाती है धूप

मुंहलगी इतनी कि पल भर साथ रह कर देखिये
पाँव छू, उंगली पकड़ फिर सर पे चढ़ जाती है धूप

किस कदर चालाक है ख़ुर्शीद की बेटी भला
खिज़ां का इल्ज़ाम रुत के सर पे मढ़ जाती है धूप

देख सन्नाटा समंदर पे हुकूमत कर चले
शहर से गुजरी कि बित्ते में सिकुड़ जाती है धूप

पूस में दुल्हन सी शर्माती लजाती है मगर
जेठ में छेड़ो तो इत्ते में बिगड़ जाती है धूप

-पद्म

ख़ुर्शीद की बेटी= सूर्य की बेटी/धूप 

मेरा एकान्त

मेरा एकान्त अक्सर ताने मारता है
कि तुम क्या हो और दिखाते क्या हो… 
क्यों नहीं एक बार झटक देते सिर 
चुका क्यों नहीं देते उधार मान्यताओं का 
दहकती हुई कविता में आग निचोड़ो
नेपथ्य से निकल कर कह डालो अपने संवाद 
मुक्त करो किसी पत्थर में फंसी मूरत 
या तूलिका से गढ़ो कोई आकाश 
जिसमे पंछी सूरज से गलबहियाँ करते हों 
तुन जिस तरह उस लड़की से
विदा ले रहे थे 
मैं समझ गया था 
तुम चप्पू भले चलाओ
घाट से बंधन नहीं खोल सकोगे 
उड़ान कितनी ऊँची कर लो
चरखी से डोर नहीं खोल सकोगे 
उछालो न कोई नाद चौताला 
नोच फेंको मुखौटे  
वरना जब भी मिलोगे  कभी अकेले मे 
छोड़ूँगा नहीं 
और पता ये भी है
गोलचक्कर में भागोगे
तो कहाँ जाओगे 
जब भी खुद से लड़ोगे
मुँह की खाओगे
-पद्म सिंह 15-03-2017

मंगलवार, 26 नवंबर 2024

लेकिन मैने हार न मानी (पद्म सिंह)



संघर्षो की अकथ कहानी।
लेकिन मैंने हार न मानी।।

आशाओं के व्योम अनंतिम
स्वप्नों का ढह जाना दिन दिन
संबंधों  के ताने बाने
नातों  का अपनापा पल छिन
क्रूर थपेड़े संघर्षों के
दुर्दिन की मनमानी,
लेकिन मैंने हार न मानी।।
 
दूर क्षितिज तक अनगिन राहें  
अनबूझी सी  फैली फैली
लक्ष्य कुहासे जैसा धूमिल  
सभी दिशाएँ मैली मैली
कभी समय से टक्कर ली तो  
कभी भाग्य से ठानी,
लेकिन मैंने हार न मानी।।

लिए  तकाज़े नए नए नित
समय खड़ा था सांझ सकारे
दुनिया के, मनके, भावों के
किसके किसके क़र्ज़ उतारे
बिखरा बिखरा बचपन देखा
टूटी हुई जवानी …..,
लेकिन मैंने हार न मानी।।

कुछ भावों के अश्रु निचोड़े
मनुहारों के धागे जोड़े
टूटे छंद बंद रिश्तों  के
जोड़े कुछ तोड़े कुछ छोड़े
निश-दिन के ताने बाने में
बुनती गई कहानी,
लेकिन मैंने हार न मानी।।

यार मिले तो यारी कर ली
दुःख की साझेदारी कर ली
ये न हुआ पर गद्दारों से
मौके पर गद्दारी कर ली
औरों  को माफ़ी दे दी  
पर अपनी गलती मानी,
लेकिन मैंने हार न मानी।।

आँखें नम थी पर मुस्काए
रुंधे गले से गीत सुनाये
शब्दों की माला पहनाई
रस छंदों के दीप जलाए
प्रभु को हंस कर किये समर्पित
नयनों निर्झर पानी,
लेकिन मैंने हार न मानी ।।

रविवार, 5 फ़रवरी 2023

जैसी चादर ले कर आए

जैसी चादर लेकर आए
वैसी धर दी जस की तस ॥

अनगिन सम्बन्धों के चेहरे
ओढ़े स्वांग भरे दिन दिन
काँटे बोए जिसने उसकी
राहों दीप धरे गिन गिन
माना नहीं पराया कुछ भी
जो भी पाया यश अपयश ।।

बहुत पुकारा नील गगन ने
कभी भीड़ ने या निर्जन ने
भरी कुलाँचें भी यौवन ने
उकसाया भी पागल मन ने
दायित्वों की डोर कहीं से
बंधी हुई थी पर कस कस ।।

समझ न आया इस जीवन में
क्या खोया है क्या पाया
किस निमित्त आए थे जग मे
प्रश्न निरुत्तर ही पाया
रोते हुए हृदय को निस दिन
खूब छकाया है हँस हँस ।।

आयु चढ़ गई पौड़ी पौड़ी
साँसें हाँफ हाँफ कर दौड़ी
मन बौराया रहा जोड़ता
धन सुख वैभव कौड़ी कौड़ी
धड़कन एक दिन थक कर बैठी
बोली साथी अब तो बस ॥

जैसी चादर ले कर आये
वैसी धर दी जस की तस

पद्म सिंह (प्रतापगढ़) उत्तर प्रदेश 7011100247

शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

कैक्टस गुलाब और गुलाबजामुन

लव गुरु से किसी चेले ने पूछा एक दिन
गुरु नारियों के भेद आज बतलाइए
कैसे किस नज़र से देखे कोई कामिनी को
सार सूत्र सुगम सकल समझाइए

गुरु बोला पहला प्रकार तो है कैक्टस का
दूसरे प्रकार की गुलाब जैसी होती हैं
तीसरा प्रकार नारियों का है गुलाब जामुन
तीन ही तरह से मुझे नज़र आती हैं
चेला बोला गुरु जी समझ नहीं आया कुछ
थोड़ा तो खुलासा कर ज्ञान रस घोलिए
कैक्टस गुलाब औ गुलाब जामुनों से अब
परदा हटाइए रहस्य जरा खोलिए

गुरु बोला कैक्टस है पहला प्रकार जिसे
दूर से ही देखते हैं छू भी नहीं सकते
चखना तो है बड़े ही दूर की कठिन बात
कैक्टस को हम सूंघ भी तो नहीं सकते
बड़े घर की निराली बालकनियों पे सजी
दूर से नाज़ारा लेके लोग ललचाएँगे
छूने का प्रयास मत करना रे प्यारे कभी
वरना तो बेहिसाब काँटे चुभ जाएँगे

दूसरा प्रकार है गुलाब जैसी प्रेयसी का
काँटो की सुरक्षा मे बहुत इतराती है
कभी अठखेलियाँ करे सहेली तितलियाँ
कभी टोली भँवरों की चक्कर लगाती हैं
पर प्रेम या गुलाब का उसूल ऐसा है कि
सूंघ सकते हैं पर चख नहीं सकते
परिणय से ही बनता गुलाब गुलकंद
बिना अपनाए उसे रख नहीं सकते

तीसरा प्रकार नारियों है गुलाब जामुन
गोल मोल लाली सी है अजब निराली सी
नरम नरम रसवंती सी लगे मगर
छूते ही जो फट पड़ती है घरवाली सी
घरवाली नारियों का तीसरा स्वरूप है जी
इत्ता सा कहूँगा उतना समझ जाइए
पत्नी गुलाब जामु न सी है इसीलिए कि
देखिये कि सूँघिए कि चाटिए कि खाइये

-पद्म सिंह 

रविवार, 10 फ़रवरी 2013

भाई हद्द है !!

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एक थैली मे रहें दिन रात.... भाई हद्द है ...
और उधर संसद मे जूता-लात... भाई हद्द है

आपके पैसे की रिश्वत आप को
सड़क बिजली घर की लालच आपको
चुनावी मौसम मे सेवक आपके
जीत कर पूंछें न अपने बाप को
आप ही के धन से धन्नासेठ हैं
आप ही पर लगाते हैं घात ... भाई हद्द है

शिकारी या भिखारी हर वेश मे
जहाँ मौका मिले धन्धा कूट लें
क्या गजब का हुनर पाया है कि ये
जिस तरफ नज़रें उठा दें लूट लें
दो धड़ों मे बाँट कर इन्सान को
एक चिंगारी उछालें .........फूट लें
अब लगी अपनी बुझाओ आप ... भाई हद्द है


जाति भाषा क्षेत्र वर्गों मे फंसी
सोच अपनी जेल बन कर रह गई
वोट के आखेट पर हैं रहनुमा
राजनीति गुलेल बन कर रह गई
लोकशाही आज के इस दौर मे
खानदानी खेल बन कर रह गई
जिन्हें उंगली पकड़ चलना सिखाया
वही बन बैठे हैं माई बाप... भाई हद्द है

Posted via email from पद्म सिंह का चिट्ठा - Padm Singh's Blog

रविवार, 13 जनवरी 2013

सर कटा भी है सर झुका भी है....

530803_254391904692461_1641089921_n                  खबर है कि सीमा पर पाकिस्तान फ्लैग वार्ता करने को तैयार है... तैयार है मतलब? जिसने पड़ोसी और शान्ति के लिए बार बार पहल करने वाले स्वयंभू दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक राष्ट्र की सीमा का उयलंघन किया हो, हर तरह से बड़े और शक्तिशाली देश के एक सैनिक का सर काट लिया हो, सीमा पर युद्ध जैसे हालात पैदा किए हों, फ्लैग वार्ता भी करने को वही तैयार होता हो। भारत जैसा सक्षम देश उस देश को फ्लैग वार्ता के लिए पुकारता रहे जिसका खर्च ही विकसित देशों की चापलूसी से चलता हो।
                  सीमा पर सीज़ फायर होने के बावजूद गोलीबारी होना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। विशेष रूप से उन दो देशों की सीमाओं पर जो आजन्म एक दूसरे के विरोधी हों गोली बारी की घटना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। आश्चर्य की बात यह भी नहीं कि एक दूसरे के जवानों को लक्ष्य कर के चलाई गयी गोली किसी सैनिक को लगे और वो शहीद हो जाए। ये अक्सर होता है और सैनिक की सेवा मे देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त करता है जो बहुत असामान्य घटना नहीं है। वास्तव मे एक देश जो हर तरह से सक्षम है, ताकतवर है और सम्प्रभु है उसकी सीमा का उलंघन करना और उसके एक सैनिक का सिर काट ले जाना पूरी तरह से उस राष्ट्र की अस्मिता पर हमला है, सीधे सीधे अपमान है... और उससे भी चिंताजनक बात यह.... कि भारत जैसे राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व की आँखों मे पानी की एक लकीर नज़र नहीं आती... निंदा प्रस्तावों और कड़े संदेशों की वही रटी रटाई सरकारी खानापूर्ति  देख कर आत्मा विहीन विशाल शरीर होने जैसा  भ्रम होता है।
                मनुष्य के विकास के साथ ही लड़ाइयाँ अस्तित्व मे हैं... पर सैन्य परम्परा की अपने कुछ अलिखित नियम भी रहे हैं...1992 मे रिटायर हो चुके और कारगिल को छोड़ कर भारत के साथ हुई सभी लड़ाइयों मे हिस्सा ले चुके ब्रिगेडियर राज बहादुर शर्मा बताते हैं जिस समय शान्ति वाहिनी सेना बंगलादेश मे पाकिस्तानी सेना को खदेड़ रही थी अपने सीनियर अधिकारी के साथ वो भी मोर्चे पर थे। पाकिस्तानी सेना किसी विदेशी सहायता की आशा मे समुद्र की ओर भाग रही थी। भारत की सेना की गति रोकने के लिए जगह जगह कुछ पाकिस्तानी टुकड़ियाँ सड़कें रोक कर खड़ी थीं। थ्री नॉट थ्री का ज़माना था, एक स्थान पर प्रतिरोध हटाने के लिए सैनिकों मे आमने सामने की संगीन वाली लड़ाई छिड़ गयी... उन्होने अपने अफसर के साथ देखा... कि सामने थोड़ी दूर पर ही एक पाकिस्तानी सैनिक ने एक भारतीय सैनिक के दोनों हाथ काट दिए थे... यह देख कर आफ़िसर का खून खौल उठा और इसका बदला लेने के लिए उन्होने बाकी टुकड़ियों को छोड़ कर तीन तोपों का मुंह केवल उस टुकड़ी की तरफ खुलवा दिया। उसमे बहुत से पाकिस्तानी सैनिक ढेर हुए और बहुत से पकड़े भी गए... लेकिन ऐसा नहीं हुआ, कि किसी सैनिक का हाथ काट कर या इस तरह की किसी हरकत से उनका अपमान किया जाता।
                   आज शहीद हेमराज के घरवालों को फख्र है कि बेटा सीमा पर शहीद हो गया... लेकिन उनकी मांग है मेरे बेटे का सर ले आओ... सेना मे सैकड़ों जवान कई दिन से खाना नहीं खा रहे हैं... उन्हें यह अपमान लगता है... अपनी आन पर हमला लगता है ऐसे मे देश का शीर्ष नेतृत्व खानापूर्ति करते रहने के अपने पुराने ढर्रे पर कायम है जो किसी भी तरह उचित नहीं है । सीने पर गोली खा कर शहीद हो जाना ज़रूर किसी सैनिक के लिए गर्व हो सकता है, यह एक सैनिक के लिए अप्रत्याशित भी नहीं। लेकिन इस तरह आतंकियों की तरह की धृष्टता भारत की अस्मिता पर सीधा सीधा प्रहार है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इस कृत्य का जवाब मजबूती से सुनिश्चित किया जाना चाहिए... और किया ही जाना चाहिए।