रविवार, 27 दिसंबर 2009

फिजां रंगीन होगी मस्त तराने होंगे ग़ज़ल....

फिजां रंगीन होगी मस्त तराने होंगे
थी तमन्ना कभी अपने भी फ़साने होंगे

यूँ तो सोचे थे मोहोब्बत न करेंगे लेकिन
क्या पता था तेरी आँखों के निशाने होंगे

एक नहीं हम ही तलबगार तेरी आँखों के
तेरे मयख़ाने में कुछ रिंद पुराने होंगे

वो मुस्करा के मिले कोई तो वजह होगी
उन्हें भी दिल के कई ज़ख्म छुपाने होंगे

हम न समझे थे गोया ये मुकाम आयेगा
क़त्ल होंगे तो मोहोब्बत के बहाने होंगे

मरने वाले की कोई आरज़ू रही होगी
उसकी आँखों में भी कुछ सपने सुहाने होंगे


दौलत गाड़ी

अब बहुत ज़माना बदल गया
मै चला किया तुम ठहर गयी
तुम प्रेम रह में बैठी थी
मेरी दौलत गाड़ी निकल गयी

तुम मुझे याद कर रोते थे
हा चादर ताने सोते थे
जब फसल पकी तब काट लिया
तुम जिसे दिनों दिन बोते थे
मै सम्हाल सम्हाल कर निकल गया
तुम प्रेम रह में फिसल गयी

हमने दुनिया को खूब छाला
तुम छलती रही ज़माने से
हमने तो अपना स्वार्थ गढ़ा
बस किसी न किसी बहाने से
मै गड्डी गड्डी ले भगा
तेरी चिल्लर पूंजी बिखर गयी

ये दुनिया है इस दुनिया में
दिल मत फेको मत प्यार करो
मत पत्थर के बाज़ारों में
शीशे का कारोबार करो
अब प्रीती प्यार समता ममता की
दुनिया जाने किधर गयी

तुम प्रेम राह में बैठी थी
मेरी दौलग गाड़ी निकल गई
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सोमवार, 14 दिसंबर 2009

रिश्ता एक बुना था मैंने

रिश्ता एक बुना था मैंने

नयी डिजाइन, नए रंग में
पश्चिम जैसे नए ढंग में
कुछ उलटे कुछ सीधे फंदे
उलझे हुए शिकंजे फंदे
पर अनजाने बीच बीच में
कुछ फंदे जो छूट गए थे
या फिर धागे टूट गए थे
छेद दिखाई देते है,
(मतभेद दिखाई देते है)
जहाँ जहाँ टूटन जोड़ी थी
गांठें सी चुभती रहती है