शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

मत लेना विश्राम

उठो पुनः हुंकार भरो करना है प्रभु का काम
जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम

सदियों के संघर्षों बलिदानों से तृषा  छँटी है।
अरुणाई की आहट है पौ देखो वहाँ फ़टी है।
भारत माता पुनः हमारा करती है आह्वान 
जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम

राजा दाहिर, वीर शिवाजी राणा को तर्पण है
भारत माता की रक्षा में शीश सदा अर्पण है 
स्वाभिमान की रक्षा में हँस कर आ जाना काम 
जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम

पुरखों ने बलिदान दिया और तप कर पुण्य कमाया
सदियों का संघर्ष कि जिसने मन्दिर भव्य बनाया
धर्म ध्वजा ले बढ़ते जाना लेना नहीं विराम 
जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम।

भान करो अर्जुन हो फिर अपनी गांडीव उठाओ
शेष तिमिर को चीर राष्ट्र को हिन्दू राष्ट्र बनाओ 
कानों में  घण्टों की ध्वनि हो मुँह में प्रभु का नाम
जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम।

शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

धीरे धीरे छूट रहा हूं

अन्दर अन्दर टूट रहा हूँ
धीरे-धीरे छूट रहा हूँ ।

सच्चा केवल अन्तर्मन है
बाहर बाहर झूठ रहा हूँ ।

रामबाण औषधि हूँ वैसे
यद्यपि कड़वा घूट रहा हूँ।

जीना कुछ आसान नहीं था
पत्थर कोपल फूट रहा हूँ।

 दोष किसे दूँ लुट जाने का,
मैं ही खुद को लूट रहा हूँ।

परत दर परत उतर रहा हूँ
जैसे  जैसे कूट रहा हूँ।


पद्म सिंह 07.09.2026