बुधवार, 1 सितंबर 2010

शह मिले या मात... देखी जायेगी

साल… दिन…शामें…लम्हे… जाने कितने ठहरावों की  फेहरिस्त  है हमारे माज़ी की डायरी मे…..कभी फुर्सत के पलों मे अचानक कोई सफहा दफअतन उलट गया तो अपनी जमा पूँजी मे से कुछ गिन्नियां तो कुछ कौडियाँ झाँकती दिखीं …  जीवन के हर पल पर हम रुक कर अपनी मौजूदगी का खुद ही इतिहास बनाते रहने की कोशिश करते रहे … जाने कितने पड़ावों की खट्टी मीठी यादों को अपने एहसासों के गिर्द लपेटे दिन ब दिन भारी होते रहे ….  हम अपने  बीते पलों को अपनी पोटली मे लटकाए घुमते रहे … न चाहते हुए भी … खुशफहम यादों ने भले साथ छोड़ दिया हो … हर अनचाहे पलों की किर्ची गाहे बगाहे अपनी मौजूदगी जरूर दर्ज करवा जाती है …. और ठीक उसी समय जब कभी नहीं चाहा कि वो यहाँ हो… जन्मदिन, वार्षिकी और जाने क्या क्या मनाते रहे और खुश होते रह…  किस बात की खुशी मनाते हैं हर पल… इसी बात की न ? … कि जो आने वाला कल है उसका क्या भरोसा … कम से कम हमारा माज़ी तो हमारी थाती है … इसीलिए तो हर पल को ठहर कर गौर से देख लेना चाहते हैं… जी लेना चाहते हैं … सामने का रास्ता धुंध से पटा है … अभी हैं अभी नहीं रहेंगे …. इसी लिए तो साल दर साल… लम्हे दर लम्हे …इतिहास बनने के लिए पल पल समेटते रहे ….रुकते रहे… ठहरते रहे  ….  लेकिन जो ठहरा नहीं कभी….. वो समय ही तो था ….
चंद अशआर आपकी नज़र कर रहा हूँ ….
Masks
जीस्त की सौगात देखी जायेगी             (जीस्त =जिंदगी)
शह  मिले  या मात देखी जायेगी

धूप है तो धूप से लड़ बावरे
रह गई बरसात,   देखी जायेगी

एक जुगनू को जला कर, बुझा कर
तीरगी की ज़ात देखी जायेगी              (तीरगी=अँधेरा)

मोहोब्बत की थाह पाने के लिए
जेब की औकात देखी जायेगी

बात कहने भर से बनती नहीं बात
बात मे कुछ बात देखी जायेगी

………आपका पद्म ०९/०१/२०१०