बुधवार, 21 अक्तूबर 2009

ग़ज़ल

दीपावली की शुभ कामनाएं सभी पाठकों को ....... आज आपको कई दिन बाद अपनी ग़ज़ल पेश कर रहा हूँ ...... आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है ,, जल्द ही आप मुझे चिटठा जगत पर पढ़ सकते है....

ये सफर काट दो मौजों की रवानी बन कर
बीत जायेगी उमर एक कहानी बन कर
हसीन मयकदा-ऐ-इश्क मस्तियाँ ओ शबाब
सब एक बार ही आते है जवानी बन कर
रुखसत ऐ यार के ग़म को भी कहाँ तक सोचें
वो भी कब तक रहेगा आँख का पानी बन कर
ज़िन्दगी चिलचिलाती धूप के सिवा क्या है
प्यार आता है मगर शाम सुहानी बन कर
इस कदर ग़म की घटाओं से न घबरा प्यारे
ये भी बरसेंगे तो बह जायेंगे पानी बन कर
आज दुनिया को मेरे ज़ज्बों की परवाह नही
खाक हो जाऊं तो ढूंडेगी दीवानी बन कर