मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

ग़ज़ल

फिजा रंगीन होगी मस्त तराने होंगे
थी तमन्ना कभी अपने भी फ़साने होंगे

यूँ तो सोचे थे मोहोब्बत न करेंगे लेकिन
क्या पता था तेरी आंखों के निशाने होंगे

एक नहीं हम ही तलबगार तेरी आंखों के
तेरे मैखाने में कुछ रिंद पुराने होंगे

वो मुस्कुरा के मिले कोई तो वजह होगी
उन्हें भी दिल के कई ज़ख्म छुपाने होंगे

हम न सोचे थे गोया ये मकाम आएगा
कत्ल होंगे तो मोहोब्बत के बहाने होंगे

मरने वाले की कोई आरजू रही होगी
उसकी आंखों में भी कुछ सपने सुहाने होंगे