सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

ठहर….ठहर….जाता कहाँ है…

० क्यूँ रे मुए तेरा दिमाग फिर गया है क्या  ?

-क्या हुआ  जी .. कुछ गलती हो गई मेरे से ?

० मै कहती हूँ तेरे घर में माँ बहन नहीं है क्या?

-क्यों ऐसा क्यों कहती हैं बहन जी … मैंने तो आपको कुछ भी नहीं कहा

०किसी और को ही क्यों कहा … तुम्हारे  अपने घर में माँ बहन नहीं है क्या …!!

-लेकिन बताइये तो सही मेरे से गलती क्या हो गयी? …

अरे तू सठिया गया लगता है मुझे तो .. तभी तो दूसरों की लुगाइयों को अपनी माँ बहन बनाता फिर रहा है

- लेकिन बहन मैंने आपको तो कुछ नहीं बोला ? आप तो खामखा हत्थे से उखड़ी जा रही हैं

० देख तू अपनी ज़बान को लगाम दे… एक तो बहन जी बहन जी बोले जा रहा है ऊपर से शराफत का ढोंग भी दिखा रहा है … बहन होगी तेरी बीवी… खबरदार दुबारा बहन बोला तो ज़बान खींच लुंगी…. मै तुझे बहन नज़र आती हूँ..?

-माफ करना ब् ब् बहन  …सॉरी … माता जी… मै आपका मतलब समझ नहीं पाया था …

अरे मुए… तू ऐसे बाज़ नहीं आएगा …. अब माता जी पर उतर आया? …इतनी भी तमीज़ नहीं कि किस उमर वाली को क्या बनाया जाता है? चखाऊं तुझे मज़ा अभी … ??…

-लेकिन मैंने तो आपको माताजी ही तो कहा है कोई गाली तो नहीं दी……….अब बहन न कहूँ …. माता जी न कहूँ तो और क्या कहूँ…. 

० आजकल के मर्दों को तमीज़ नाम की चीज़ नहीं रह गयी है….और उसमे ओल्ड फैशन्ड लोगों ने वैचारिक स्वतंत्रता  की वाट लगा रखी  है… अरे भाभी, मैडम मोहतरमा या निक नेम से बुलाते तुम्हारी जीभ जल जाती है क्या ?………देखने में तो पढ़े लिखे मोडर्न लगते हो…काम गँवारों जैसे … और फिर रिश्ते बनाते समय कम से कम उम्र का तो ख़याल कर लिया करो ??………किसी ने ठीक ही कहा है…. पढ़ लिख कर ज्ञान तो सब बटोर लेते हैं…लेकिन कुछ लोग संस्कार से कंगले ही रह जाते हैं... अरे मोडर्न ज़माना है, जानू, डार्लिंग, स्वीटी वगैरह की जगह माता जी, बहन जी …???   कौन से अजायबघर से आये हो?

-देखिये म्म म्मा मैडम जी…मुझे सिखाया गया था कि पराई स्त्रियों को माँ बहन की नज़र से देखो…. इज्ज़त से पेश आओ… इसी लिए मै…वो ..

० अच्छा तो बात अब समझ में आई … मोडर्न कल्चर तो तुम लोग सूँघ भी नहीं पाए हो अभी तक … ये सूट टाई देख के मै धोखा खा गयी थी… अभी हम लोग तुम्हें पापा, अंकल या चचा बोलने लगें तो ..?? चले आते हैं जाने कहाँ से…!!!

-जी वो ऐसा था कि …. 

अच्छा अच्छा … एक बात बताओ …. तुम करते क्या हो ?

-वो क्या है कि वैसे तो अपना छोटा मोटा काम है … लेकिन टाइम पास करने के लिए थोड़ी बहुत ब्लोगिंग कर लेता हूँ …

० ओहो .. तो नए नए  ब्लॉगर हो … तभी तो कहूँ … ये हर किसी को “जी”, “जी”, भाई साब, सर सर..कहने की आदत कहाँ से सीख ली… वैसे कितने दिन से ब्लोगिंग करते हो..?

-अभी तो नया ही समझिए… फिर भी खा कमा कर दस बारह टिप्पणियाँ खैंच ही लेता हूँ…

० अच्छा ? मतलब अभी  ब्लोगिंग के लडकपन के दौर में हो…

- जी ऐसे ही समझ लीजिए….

० ह्म्म्म… तो मतलब तुमने अभी तक कोई गुरु, केयर टेकर, या गाड-फादर नहीं थामा!!!

-नहीं जी… सलाहें तो बहुत सी पढ़ने को मिलती हैं लेकिन मेरे ऊपर कोई “केयर ही नहीं टेकता… “

० तुम्हें अभी तक मेरी बात समझ में नहीं आई लगता है… अभी तक जी, जी लगा रखा है … इंटरनेट और ब्लोगिंग ग्लोबलाइजेशन के नए दौर की शुरुआत है डूड .. वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा यहीं तो परवान चढ़ती है… अब औपचारिकताओं के चक्कर में ही पड़े रहोगे तो एक दूसरे के नज़दीक कैसे आओगे ?…

-देखिये मै सीधा सादा शादी शुदा ब्लॉगर हूँ जी… नज़दीक आ कर मै क्या करूँगा …

० अरे तुम रह गए निरे ब्लॉगर के ब्लॉगर …. मेरा मतलब था कि इस तरह लोगों से  जान पहचान कैसे बनेगी कैसे एक दूसरे को जानोगे … फेसबुकिये बनो आर्कुटिंग करो, चैटियाओ तब थोड़ा मोडर्न तहजीब आएगी तुम्हें …

- देखिये जी.. मेरी पत्नी मुझे जब इंटरनेट पर बैठे देखती है, आर्कुट और फेसबुक पर दोस्ती करते देखती है…. ब्लॉग पोस्टों पर महिलाओं के कमेन्ट देखती है उसे जाने क्या हो जाता है…. मेरा जीना हराम करके रख देती है…मुझे निठल्ला, कामचोर जैसी गालियों से नवाजती है और कोसती है सो अलग… मै बड़ी मेहनत से रात भर जाग जाग कर पोस्टें लिखता हूँ …एक तो उनपर टिप्पणी नहीं मिलती ऊपर से घर  के साथ साथ ब्लॉग जगत में मेरी इज्जत भी नहीं हो रही है … आप ही बताओ मै क्या करूँ…

० अरे बुद्धू … इसका मतलब तुम कभी ब्लॉगर मीट में नहीं गए लगता है… मैने कई बार इस समस्या हल ब्लॉग जगत के सामने उद्घाटित किया है… आज तुम भी सुनो .. पहले तो ऐसा फील करना शुरू करो कि हिंदी की रक्षा का सारा दारोमदार तुम्हारे काँधे पर है… अगर तुम नहीं लिखोगे तो हिंदी को कोई नहीं बचा पायेगा… दूसरे घर में जितने सदस्य हो सब को ब्लोगिंग शुरू करवाओ… सब से पहले तो अपनी पत्नी के नाम से ही एक ब्लॉग बनाओ… उसकी पुरानी वाली कोई झकास सी फोटो सहित बढ़िया सी प्रोफाइल बनाओ… 

-लेकिन उसे तो कुछ भी लिखना विखना नहीं आता… हाँ किसी की टांग खिंचाई और मुंहजोरी बेहतरीन कर लेती है…हाँ बचपन से उसे नेतागीरी का बड़ा शौक रहा है जी… लेकिन चूल्हे चौके में फंस कर बेचारी…!!!

लो कल्लो बात, … ब्लोगिंग के लिए ये चीज़े तो सबसे ज्यादा ज़रूरी हैं… उसके नाम से अल्लम गल्लम कुछ भी दोचार पोस्टें डालो और लोगों को लिंक मेल कर दो…   इससे भी बात न बने तो दोचार गुरुघंटाल… मठाधीश टाइप के ब्लॉगरों के ब्लॉग पर जा कर खरी खरी जो लगे लिख दो…. बस देखो… अगर मोडरेटर से बच गयी तो एक टिप्पणी ही  तुम्हारी बीवी को (बद)नाम कर देगी….फिर होगा ये कि ब्लोगिंग की रीति के हिसाब से नया पाठक(शिकार) समझ के दोचार लोग ज़रूर उसकी पोस्ट पर  “दिल को छू गया" “ज़बरदस्त" “आपकी लेखनी चूमने को जी चाहता है", जैसे दो चार कमेन्ट दे ही जायेंगे …और नहीं तो फेमिनिस्ट ब्लॉगर तो हैं ही बैकअप के लिए… धीरे धीरे जितनी उजड्डता करेगी उतनी ही नेतागीरी चमकती जायेगी… उतनी ही चर्चा में रहेगी …बिग बॉस नहीं देखते क्या ?

-अच्छा जी.. फिर मेरी पत्नी का शौक पूरा हो जाएगा  ?

०  और नहीं तो क्या ? … तारीफ़ किसको नहीं अच्छी लगती है… सच्ची हो या झूठी,… धीरे धीरे उसे उसे भी ब्लोगिंग की लत पड़ जायेगी…एक पोस्ट लिखते ही किचेन से दौड़ दौड़ कर टिप्पणी गिनने पहुंचा करेगी… रातों रात कनाडा से ले कर  छत्तीसगढ़ तक शोहरत हो जायेगी …पत्नी इंटरनेशनल हो जायेगी … आप भी खुश वो भी खुश… और इससे दोहरा फायदा भी होगा  हिंदी को (आभासी)तरक्की भी मिलेगी… और ऐडसेंस के हिंदी ब्लॉग पर आने से कमाई के रास्ते भी खुलेंगे…

-देखो जी … आप तो मुझे महारथी लग रही हैं…आपके ब्लोगिंग ज्ञान से मै अभिभूत हूँ… अगर आपको बुरा न  लगे तो दोचार टिप्स और दें सफल ब्लॉगरी के…

० हाँ अब लाइन पर आते दीख रहे हो… संगत में रहोगे तो तुम्हें कहाँ से कहाँ पहुँचा दूंगी  … लेकिन इसके लिए सबसे पहले शराफत छोडनी पड़ेगी तुम्हें… खुद कुछ भी करो… लेकिन दूसरों को कोसने से बाज़ मत आओ…. दुनिया में जाने क्या क्या घट रहा है…सब लिख मारो…ब्लॉग जगत को अपनी देख रेख में रखो…किसी की मज़ाल न हो कि तुम्हारे विचारों से इतर कुछ भी लिखे… दाना पानी ले कर चढ़े रहो… अपने ब्लॉग को निजी हमाम कम पाखाने जैसा समझो …. जहाँ दिन भर की घर और  दुनिया भर से मिली खुन्नस  को दूसरों को लक्ष्य करते हुए वमन कर दो… इससे तुम्हारा चित्त शान्त हो जाएगा… और तुम्हें नींद भी अच्छे से आएगी …(दूसरों की उड़े सो उड़ जाए )

-मुझे माफ कर दीजिए मै अज्ञानी…आपको समझ न पाया था … आप तो ब्लॉग जगत की डॉली निकलीं… जो अपने (उजड्डपन के) दम पर बिगबॉस  से अपना तम्बू उखड़ने नहीं देती  हैं … आप मेरे ऊपर कृपा करें…मै कोई लेखक तो हूँ नहीं… न ही मुझे कविता शविता, रचना वचना करनी आती है… ऐसे में अपनी ब्लोगिंग की दूकान कैसे चलाऊं? जरा इस पर भी अपने आशीर्वचन कहें

० चलो तुम कहते हो तो कुछ मन्त्र और ले लो … ये बहुत आसान है… एक ब्लॉग ऐसा बनाओ जो किसी कम्युनिटी, लिंग  अथवा किसी धड़े विशेष का प्रतिनिधित्व करता हो… स्वयं उसके मोडरेटर बन जाओ और ढेर सारे कंट्रीब्यूटर शामिल कर लो… बस जी…तुम्हारा मल्टीप्लेक्स थियेटर तैयार है… टिप्पणियों का मोडरेटर चालू रखो… अपने हिसाब की टिप्पणियाँ रिलीज़ करो बाकी टिप्पणियों का गर्भ में ही घोट दो… फिर देखो… बिना तुम्हारे कुछ किये धरे दुकान चल निकलेगी… लेकिन हाँ … एक बात ज़रूर याद रखना… बीच बीच में किसी ब्लॉग अथवा पोस्ट के विषय में तंज करते हुए एक दो पोस्ट ज़रूर डालते रहना … इस से तुम्हारा ब्लॉग चर्चा में बना रहेगा…

- अभिभूत हूँ… आपने मेरे ज्ञान चक्षु खोल दिए… मै बेचारा यदि आपके सानिध्य में न आता तो अज्ञानी ही मर जाता … आगे और क्या आज्ञा है आपकी… 

० देखो … चंद बातें और याद रखो… खुद भले कोई सृजनात्मक पोस्ट न लिखो… लेकिन सदैव हिंदी हित की बातें… ब्लॉग हित की बातें… और नए ब्लॉगर्स के लिए सलाहें… पुराने ब्लॉगर्स पर चुटकियाँ…अपनी  पोस्टों के रूप में डालना मत भूलना … इससे तुम बरिष्ठ ब्लॉगर्स में शामिल हो जाओगे…

- जी मै साSब समझ गया … अब आप अंतिम मन्त्र और दे कर मुझे कृतार्थ करें…

० अंतिम बात सदैव ध्यान रखना … एक हाथ दे एक हाथ ले की बात कभी मत भूलना … कोई भी एग्रीगेटर खोल कर सारी पोस्टों पर जाना .. धडाधड… दो तीन सौ पोस्टों पर आह वाह की टिप्पणी कर आना… पढ़ना कोई ज़रूरी नहीं … बाक़ी सब भली करेंगे राम..

-(घुटनों पर बैठ कर)…. हे मेरी ब्लॉगर माता… मै अज्ञानी मुझे कुछ नहीं आता … आपका ज्ञान सर आँखों पर … हे मेरी बहना … अगर ब्लॉग जगत में है रहना… तो याद रखूँगा आपका कहना … जय हो…. जय हो…माते ..

० कमीने …तूने फिर माँ बहन बोला… इत्ती देर से तुझे समझा रही हूँ … लेकिन तू ठहरा निरा गधा…. तेरे घर में माँ बहन नहीं है क्या …जो राह चलते किसी को भी माँ बहन कहने लगता है… ठहर तुझे मज़ा चखाती हूँ…

०…… ठहर जाता कहाँ है… मै तेरी खबर लुंगी …छोड़ने वाली नहीं हूँ तुझे मै… अपने ब्लॉग पर लूँगी तेरी …. तू तड़पेगा  अपनी सफाई देने को और तेरी टिप्पणी का गला मोडरेटर में ही घोंट दूंगी…ओय…रुक ..!!!

…ओए…. ठहर ठहर …  जाता कहाँ है…SSSSSSS!!!

 

 

(निर्मल हास्य)…… द्वारा पद्म सिंह